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9 principles to develop the mindset to overcome fear of failure || असफलता के डर पर काबू पाने के लिए मानसिकता विकसित करने के 9 सिद्धांत

 I have seen a lot of success in life. But before every success there was a 'fear of failure' to win over. 9 principles to develop the mindset to overcome fear of failure:  Principle 1: Resilience Forge 👉 Do things that immolate the fear of failure  Take up activities that are challenging and the chance of failure/losing are high. Once you lose enough number of times, it'll remove that fear from your mind. Principle 2: Attempt Paradox 👉 Think of the worst case. A batchmate wanted to quit MBA from IIM as she feared failing an exam & not being able to complete. Worst case was anyways failure. She tried & won. Quitting is the same as failing. So might as well  try. Principle 3: Embracing the Fall 👉 Start the task thinking that you are going to fail. But put your best effort & heart into it.  In other words, do the task to fail! Stop thinking of results, just try to start AND finish. You will see that you will actually work better! Principle 4: T...
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अच्छे कर्मों का फल || acche karm ka fal || motivational story

ये कहानी है एक गरीब लड़के की एक ऐसा लड़का जिसके फैमिली में ज्यादा पैसा नहीं था वो स्कूल के बाद में घर घर जा कर के सामान बेचता था और उस सामान से जो पैसा इसे मिलता था उस पैसे से वो स्कूल की फीस भरता था।  ये लड़का एक दिन ऐसे ही दोपहर में निकला हुआ था सामान बेचने के लिए घर-घर जा रहा था दरबाजा खट खटा रहा था। उसे जोर की भूख भी लग रही थी तो उसने निर्णय लिया की अब वो जिस भी घर का दरबाजा खट खटाएगा उसे पैसे के बदले खाना मांग लेगा।  ये गया जा कर के दरवाजा खट खटाया। जब दरवाजा खुला तो अंदर से एक लड़की निकली लड़की को देख करके हका बका हो गया तो उसने अचानक से घबरा कर के एक गिलास पानी मांग लिया, एक गिलास पानी मिलेगा। वो लड़की अंदर गयी किचन में जा करके सोचने लगी ये लड़का बड़ा परेशान सा हो रखा है  । पसीना आ रहा है सामान लेके ढो रहा है इधर से उधर सामान बेच रहा है मुझे लगत है भूखा होगा तो उस लड़की ने एक गिलास दूध लेके आई और दूध ला कर के इस लड़के को दे दिया और उस लड़के ने दूध पीलिया धीरे धीरे और सोच रहा था ऊपर वाला अभी है अभी भी इंसानियत जिन्दा है  । उपरवाले का धन्यवाद करनी चाहिए सारी अच्...

मेहनत और मेहरबानी | Mehnat aur Mehrbani Story

 एक संत गांव से गुजर रहे थे। उन्होंने लहलहाते हुए गेहूं के पौधों को देखकर कहा, 'भगवान की कृपा से इस बार फसल बहुत अच्छी हुई है। खेत के किनारे हुक्का गुड़गुड़ाते हुए किसान ने यह सुना तो वह बोला,साधु बाबा, इसमें भगवान की कृपा कहां से  आ  टपकी।  मैंने  खून -पसीना  एक कर खेत जोता, बीज  बोया तथा पानी देता रहा।  मेरे परिश्रम के कारण ही खेत लहलहा रहा।' संत ने किसान के शब्द सुने तथा मुस्कराते हए आगे बढ़ गए।  कुछ दिन बाद संत उसी रास्ते  से लौट रहे थे।    उन्होंने उसी खेत के किनारे लगे  पेड के नीचे विश्राम किया। उन्होंने देखा कि  गेहूं  के पौधे झुलसे पड़े हैं।  उनमें कीड़ा भी लग गयाथा। किसान संत के लिए लोटा भर कर पानी लाया।  संत ने दुखी मन से  सहानुभूति व्यक्त की और कहा, 'भैया  बहुत बुरा हुआ। हरे-भरे खेतों को क्या हो गया? ' किसान ने कहा, 'महाराज,  मुझे भगवान ने तबाह कर दिया। तमाम फसल को कीड़ा चट कर गया।  यह  सुनते ही संत ने कहा, 'भैया, पिछले दिनों तो तुम खेत लहलहाते देखकर कह रहे थे...

डाकू अंगुलिमाल और महात्मा बुद्ध || Buddha Angulimal Story in Hindi

  बहुत पुरानी बात है मगध राज्य में एक सोनापुर नाम का गाँव था। उस गाँव के लोग शाम होते ही अपने घरों में आ जाते थे। और सुबह होने से पहले कोई कोई भी घर के बाहर कदम भी नहीं रखता था।इसका कारण डाकू अंगुलीमाल था।      डाकू अंगुलिमाल मगध राज्य के जंगलों में रहता था। लोगों को लूटना और उनको जान से मार देना उसका काम था।  व्यक्ति को भी मार कर उसकी एक ऊंगली काटकर उसकी माला बनाकर पहन लेता था, जिससे उसका नाम अंगुलिमाल हो गया।  डाकू ने एक हज़ार अंगुलियां पहनने की कसम खाई थी।  एक दिन महात्मा बुद्ध उस जंगल के समीप बसे गांव में आए। बुद्ध ने गांववालों से पूछा आप लोग इतने डरे हुए क्यों लग रहे हो।  गांववालों ने डाकू के डर की बात कही। अगले दिन बुद्ध उसी जंगल की तरफ निकल गए। गांववालों ने बुद्ध को रोकना भी चाहा, लेकिन बुद्ध नहीं माने।  जंगल के बीच मचान पर बैठे अंगुलिमाल ने बुद्ध को देखा और मचान से उतरकर, हाथ में तलवार लेकर बुद्ध की तरफ भागा। बुद्ध आगे बढ़े जा रहे थे अंगुलिमाल पीछे से जोर-जोर से बोल रहा था ‘रुको’ ‘रुको’।  बुद्ध नहीं रुके, डाकू को और क्रोध आ गया वो...

शेखीबाज़ मक्खी | shekhibaj makhi

  एक था जंगल। उस जंगल में एक शेर भोजन करके आराम कर रहा था। इतने में एक मक्खी उड़ती- उड़ती वहाँ आ पहुँची। शेर ने दो-तीन दिनों से स्नान नहीं किया था। इसलिए मक्खी शेर के कान के एकदम पास भिन-भिन-भिन करने लगी। शेर को बहुत मुश्किल से नींद आई थी। उसने पंजा उठाया। मक्खी उड़ गई ... लेकिन फिर से शेर के कान के पास भिन-भिन शुरू हो गई। अब शेर को गुस्सा आया। वह दहाड़ा-अरे मक्खी , दूर हट। वरना तुझे अभी जान से मार डालूँगा। मक्खी ने धीरे से कहा- छि... छि... ! जंगल के राजा के मुँह से ऐसी भाषा कहीं शोभा देती है? शेर का गुस्सा बढ़ गया। उसने कहा – एक तो मुझे सोने नहीं देती, ऊपर से मेरे सामने जवाब देती है! चुप हो जा... वरना अभी... मक्खी बोली – वरना क्या कर लोगे? मैं क्या तुमसे डर जाऊँगी? मैं तो तुमसे भी लड़ सकती हूँ। हिम्मत हो तो आ जाओ...! शेर आग बबूला हो उठा। उसने कान के पास पंजा मारा। मक्खी तो उड़ गई पर कान ज़रा छिल गया। मक्खी उड़कर शेर की नाक पर बैठी तो उसने मक्खी को फिर पंजा मारा। मक्खी उड़ गई। अबकी बार शेर की नाक छिल गई। मक्खी कभी शेर के माथे पर बैठती, कभी गाल पर, तो कभी गर्दन पर। शेर पंजा मारत...

डॉ भीमराव अम्बेडकर का जीवन परिचय | B R Ambedkar biography in hindi

डॉ भीमराव अम्बेडकर का जीवन परिचय, बायोग्राफी, जीवनी, लॉ यूनिवर्सिटी जयपुर, अनमोल विचार, राजनितिक विचार, जयंती, शिक्षा, धर्म, जाति, मृत्यु कब हुई थी, शायरी, आत्मकथा (Dr Bhim Rao Ambedkar Quotes, Biography in Hindi) (Jeevan Parichay, Jayanti, Speech, History, University, Quotes, Caste, Religion) डॉ भीमराव अम्बेडकर को बाबासाहेब नाम से भी जाना जाता है. अम्बेडकर जी उनमें से एक है, जिन्होंने भारत के संबिधान को बनाने में अपना योगदान दिया था. अम्बेडकर जी एक जाने माने राजनेता व प्रख्यात विधिवेत्ता थे. इन्होंने देश में से छुआ छूत, जातिवाद को मिटाने के लिए बहुत से आन्दोलन किये. इन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों को दे दिया, दलित व पिछड़ी जाति के हक के लिए इन्होंने कड़ी मेहनत की. आजादी के बाद  पंडित जवाहरलाल नेहरु  के कैबिनेट में पहली बार अम्बेडकर जी को लॉ मिनिस्टर बनाया गया था. अपने अच्छे काम व देश के लिए बहुत कुछ करने के लिए अम्बेडकर जी को 1990 में देश के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया.   Contents [ hide ] डॉ भीमराव अम्बेडकर का जीवन परिचय (Dr B. R. Ambedkar Biography in Hin...

माला फेरत जुग भया दोहे का अर्थ | Mala Ferat Jug Bhaya Meaning in Hindi

     माला फेरत जुग भया :   माला फेरते फेरते युग बिता दिए.        फि रा न मन का फेर:   लेकिन अब तक मन शांत नही हुआ.         कर का मनका डार दे:   हाथ का मनका छोड़ दे.                       मन का मनका फेर:   मन की माला फेरना शुरू कर इस दोहे में कबीर जी कहते हैं कि भगवान का नाम लेते लेते, माला जपते-जपतेे तुमने युगों-युग बिता दिए। सारा जीवन तुमने माला के मनके घूमाने में लगा दिया। लेकिन अब तक तुम्हे अपने मन की शांति की प्राप्ति नहीं हुई। जिस मन की शांति के लिए तुम सदा भगवान की माला जपते रहते हो वह शांति तुम्हें आज तक नहीं मिली इसलिए इस हाथ में पकड़े मनके को जिसे तुम माला में डालकर घुमा रहे हो इन्हें छोड़ कर अपने मन के मनको का ध्यान करो। अपने मन को शुद्ध करो, अपने विचार में शुद्धता लाओ तभी तुम्हें मन की शांति की प्राप्त होगी। व्याख्या :  सिर्फ भगवान की स्तुति करना या माला जपते रहने से मन शांत हो जाएगा ऐसा सोचना गलत है। क्योंकि मन की शांति तभी मिलती है ज...