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फैसला। Faisla

            प्रस्तुत कहानी में रामन नामक बालक की समझ और चतुराई का रोचक वर्णन किया गया है। कई वर्ष पहले एक घने जंगल में चार चोर रहते थे। चुराया हुआ धन वे एक साधारण से बर्तन में रखते थे, लेकिन उसकी हिफ़ाजत जान से भी ज़्यादा करते थे। कुछ अरसे बाद उनका मन चोरी-चकारी से ऊब गया। “मैं तो ऐसी जिंदगी से तंग आ गया हूँ। हमें हमेशा चौकन्ना रहना पड़ता है, वरना हम पकड़े भी जा सकते हैं।", एक ने अपना दुखड़ा रोया। “हाँ, मैं भी चाहता हूँ कि हम लोग एक शांत-सच्ची जिंदगी जिएँ!", दूसरे चोर ने हाँ में हाँ मिलाई। 'बहुत अच्छा! हम जंगल छोड़कर किसी ऐसे शहर में चलते हैं, जहाँ हमें कोई जानता न हो। शायद कोई साफ़-सुथरा काम-धंधा ही हाथ लग जाए", तीसरा बोला। तीन चोरों को तो यह सुझाव पसंद आया और उन्होंने तय कर लिया कि वे जंगल छोड़ देंगे, लेकिन चौथे चोर को अपनी जीविका के लिए कोई खरा धंधा करने की योजना पसंद नहीं आई। उस समय तो वह चुप रहा, लेकिन उसने बर्तन में रखे पैसे चुराकर भाग जाने इरादा कर लिया। वह सही मौके का इंतज़ार करने लगा। चारों चोर एक शहर में पहुंचे और वहाँ एक धर्मशाला 'छत्रम' में...

गुरु का स्थान | Teachers Day Story

  गुरु पर हिंदी कहानी एक राजा था. उसे पढने लिखने का बहुत शौक था. एक बार उसने मंत्री-परिषद् के माध्यम से अपने लिए एक शिक्षक की व्यवस्था की. शिक्षक राजा को पढ़ाने के लिए आने लगा. राजा को शिक्षा ग्रहण करते हुए कई महीने बीत गए, मगर राजा को कोई लाभ नहीं हुआ. गुरु तो रोज खूब मेहनत करता थे परन्तु राजा को उस शिक्षा का कोई फ़ायदा नहीं हो रहा था.  राजा बड़ा परेशान, गुरु की प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना भी गलत था क्योंकि वो एक बहुत ही प्रसिद्द और योग्य गुरु थे. आखिर में एक दिन रानी ने राजा को सलाह दी कि राजन आप इस सवाल का जवाब गुरु जी से ही पूछ कर देखिये.  राजा ने एक दिन हिम्मत करके गुरूजी के सामने अपनी जिज्ञासा रखी, ” हे गुरुवर , क्षमा कीजियेगा , मैं कई महीनो से आपसे शिक्षा ग्रहण कर रहा हूँ पर मुझे इसका कोई लाभ नहीं हो रहा है. ऐसा क्यों है ?”  गुरु जी ने बड़े ही शांत स्वर में जवाब दिया, ” राजन इसका कारण बहुत ही सीधा सा है…”  ” गुरुवर कृपा कर के आप शीघ्र इस प्रश्न का उत्तर दीजिये “, राजा ने विनती की.  गुरूजी ने कहा, “राजन बात बहुत छोटी है परन्तु आप अपने ‘बड़े’ होने के अ...