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जून, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

उदास रहने की कोई वजह जरुर होगी | There must be some reason to be sad

जिंदगी कभी एक समान नहीं चलती, इसमें उतार चढ़ाव आते रहते हैं। मन कभी प्रसन्नता का अहसास करता है तो कभी यह दुखी भी होता है। कभी-कभी तो ऐसा होता है कि बिना वजह ही हम उदास हो जाते हैं। लेकिन कहते हैं कि बिना वजह तो कुछ भी नहीं होता। ऐसे में इस  ‘ बिना वजह ’    की उदासी के पीछे की वजह को समझना भी जरुरी है। मानव शरीर में मन की संरचना बेहद जटिल है। वैज्ञानिक इसको जितना समझने की कोशिश करते हैं, उतनी ही इसकी जटिलता और बढ़ती चली जाती है। मन को शरीर का केंद्र बिंदु या ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। इसलिए इसको स्वस्थ रखना जरुरी है। उदासी का कारण         नींद ना आना देर रात तक चैटिंग करना सोने के गलत तरीके रात में इलेक्ट्राॅनिक गैजेट का उपयोग नकारात्मक सोच दूसरों की तुलना करना जो समस्याएं आपके जीवन में नहीं आई हैं, उनको लेकर दिन-रात सोचते हैं या  vkWfQl  का कोई तनाव है तो ये सब आपकी उदासी का सबब बन जाते हैं।              उदासी से बचने के उपाय अच्छी नींद लेना सोने से एक घंटा पहले मोबाई का उपयोग बंद क...

मुनि का तेज | muni ka tej | story

मुनि का तेज उतंक मुनि भगवान विष्णु के परम भक्त थे। वह एक मंदिर में रहकर भगवान की भक्ति, शास्त्राध्ययन तथा गृहस्थजनों को सदुपदेष देने में लगे रहते थे। राजा मुनि के त्याग, तपस्यामय जीवन से बहुत प्रभावित था। उसने उस मंदिर को तीर्थ मानकर सोने का शिखर भेंट किया। उस क्षेत्र में डाकू कणिक का बहुत आतंक था। एक दिन वह अपने गिरोह के साथ मंदिर के पास से निकला, तो स्वर्ण शिखर को देखकर रुक गया। उसने सोचा, जब मंदिर का  शिखर  सोने का है, तो पुजारी के पास भी अवष्य धन होगा। कणिक ने उसी रात मंदिर पर धावा बोल दिया। वह मंदिर में घुसा, तो देखा कि एक महात्मा ध्यान में लीन हैं। उसने तलवार लहराते हुए महात्मा से कहा, सारा सोना हमारे हवाले कर दो, नहीं तो काट डालूंगा। मुनि ध्यान लगाए बैठे रहे। कणिक ने उन्हें धक्का देकर गिरा दिया, पर देखा कि मुनि की आंखों से तेज बरस रहा है। उसके हाथ से तलवार छूटकर गिर पड़ी। वह हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। मुनि उतंक ने कहा, भैया, तुम लूटपाट क्यों करते हो? किसी को सतकार प्राप्त किए गए धन से भला कभी नहीं होता। कणिक ने सिर पटक-पटककर जान दे दी। मुनि ने उसके षव पर भगवान विष्णु का चरण...

बच्चे बड़ों से सीखते हैं | Children learn from Parents

बच्चे   अपने   माता – पिता   को देखकर ही सब कुछ सीखते है जैसे आदतें , तौर – तरीके , बोलचाल इत्यादि। । बच्चों के लिए उनके   माता – पिता   हमेशा उनके उदहारण होते हैं , कभी – कभी मुसीबत पड़ने पर वो उनके द्वारा बताए गए मार्गदर्शन का पालन भी करते हैं , और बच्चों को छोटी उम्र से ही यह आदत पड़ जाती है।जैसे – जैसे बच्चे बढ़ते हैं , वह अपने माता – पिता के व्यवहार और कार्यों का अनुकरण करते हैं , बच्चों के लिए उनके माता – पिता आदर्श होते हैं। उनकी   बुद्धिमत्ता   और आदतें भी बच्चों में जाती है हैं।इसलिए ,  बच्चों   को अच्छी और बुरी आदतों के बीच का अंतर समझाना और अच्छी आदतों को अपनाने के लिए कहना जरूरी होता है।  मृणाल ताई एक समाज सेविका थीं। गरीब और बेसहारा महिलाओं को उनका हक दिलाने में वह मदद करती थीं। उच्च वर्ग के लोग तो उनका आदर करते ही थे, निचले तबके के लोग भी उनका सम्मान करते थे। वह सभी को समान भाव से देखतीं और बड़ी इज्जत से बात करती थीं। उनका परिवार भी...

आपको आज भी महाभारत के मिल जाएंगे पात्र, जानिए आसपास के लोगों का व्यवहार किन किरदारों से मिलता है | Mahabharat Characters

Contents [ hide ]  आपको आज भी महाभारत के मिल जाएंगे पात्र, जानिए आसपास के लोगों का व्यवहार किन किरदारों से मिलता है  महाभारत लगभग हम सभी ने टेलीविजन पर फिल्मों के जरिए व चैनल के जरिए देखा होगा और जाना होगा कि इस कथा में कौन-कौन से पात्र हैं। अधिकांश तौर पर हम सभी जानते होंगे कि महाभारत में कृष्ण, अर्जुन, युधिष्ठिर, अश्वत्थामा, कर्ण, भीम, दुर्योधन, द्रौपदी, युधिष्ठिर, धृतराष्ट्र आदि ये सभी द्वापर युग के पात्र हैं लेकिन आपको कलयुग में भी ऐसे पात्र कहीं भी मिल जाएंगे। आइए जानते हैं कौन-कौन से पात्र आपको आसानी से लोगों में मिल सकते हैं। द्रोणाचार्य व कृपाचार्य द्रोणाचार्य व कृपाचार्य ऐसे ज्ञानी पुरुष आपको आज भी मिलेंगे जो मजबूरी के कारण गलत लोगों का साथ देते हुए चलते हैं। इसके अलावा आपको कई ऐसे पिता मिल जाएंगे जो धृतराष्ट्र की तरह होंगे। जो पुत्र मोह में अंधे होकर बच्चों को बिगाड़ने का काम करते हैं। दुर्योधन दुर्योधन जैसे अहंकारी लोग बड़ी संख्या में दिखाई पड़ेंगे, जो अपने अपमान की आग में सभी के दुख का कारण बनते हैं। इसके अलावा आपको युधिष्ठिर की तरह सदाचारी लोग भी मिलेंगे ज...

योग पर 10 अनमोल विचार | yog per anmol vichar

1 . जब आप सांस लेते हैं , आप भगवान से शक्ति ले रहे होते हैं। जब आप सांस छोड़ते हैं तो ये उस सेवा को दर्शाता है जो आप दुनिया को दे रहे हैं। B.K.S. Iyengar   2 .  ध्यान से ज्ञान आता है; ध्यान की कमी अज्ञानता लाती है। अच्छी तरह जानो कि क्या तुम्हे आगे ले जाता है और क्या तुम्हे रोके रखता है, और उस पथ को चुनो जो ज्ञान की ओर ले जाता है। Buddha 3 .    मेरे लिए, योग सिर्फ एक कसरत नहीं है – यह अपने आप पर काम करने के बारे में है। Mary Glover 4 .   धन्य हैं वे लचीले लोग, क्योंकि उनके आकार को नहीं बिगड़ना पड़ेगा। Unknown  अज्ञात 5 . जब पुछा गया उसे अपने जन्मदिन पर क्या उपहार चाहिए , योगी बोला : मुझे किसी उपहार की नहीं बस आपके उपस्थिति की कामना है। Unknown  अज्ञात 6 . जो कोई भी अभ्यास करता है वह योग में सफलता पा सकता है लेकिन वो नहीं जो आलसी है। केवल निरंतर अभ्यास ही सफलता का रहस्य है। Svatmarama  स्वात्मरामा 7 . योग मन को स्थिर करने की क्रिया है। Patanjali  पतंजलि 8 .  आप कौन हैं इस बारे में उत्सुक होने के लिए योग एक सही अवसर है। Jason Crandell...

जो बीत गया सो बीत गया | buddha story

बुद्ध भगवान एक गाँव में उपदेश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि “हर किसी को धरती माता की तरह सहनशील तथा क्षमाशील होना चाहिए। क्रोध ऐसी आग है जिसमें क्रोध करनेवाला दूसरोँ को जलाएगा तथा खुद भी जल जाएगा।” सभा में सभी शान्ति से बुद्ध की वाणी सून रहे थे, लेकिन वहाँ स्वभाव से ही अतिक्रोधी एक ऐसा व्यक्ति भी बैठा हुआ था जिसे ये सारी बातें बेतुकी लग रही थी । वह कुछ देर ये सब सुनता रहा फिर अचानक ही आग- बबूला होकर बोलने लगा, “तुम पाखंडी हो। बड़ी-बड़ी बाते करना यही तुम्हारा काम। है। तुम लोगों को भ्रमित कर रहे हो। तुम्हारी ये बातें आज के समय में कोई मायने नहीं रखतीं” ऐसे कई कटु वचनों सुनकर भी बुद्ध शांत रहे। अपनी बातोँ से ना तो वह दुखी हुए, ना ही कोई प्रतिक्रिया की; यह देखकर वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गया और उसने बुद्ध के मुंह पर थूक कर वहाँ से चला गया। अगले दिन जब उस व्यक्ति का क्रोध शांत हुआ तो उसे अपने बुरे व्यवहार के कारण पछतावे की आग में जलने लगा और वह उन्हें ढूंढते हुए उसी स्थान पर पहुंचा, पर बुद्ध कहाँ मिलते वह तो अपने शिष्यों के साथ पास वाले एक अन्य गाँव निकल चुके थे । व्यक्ति ने बुद्ध के बारे मे...

हार गया लेकिन खुद से जीत गया | haar gyea lekin khud se jeet gyea

  दोस्तों नमस्कार आप सभी का स्वागत है आज मैं आपको एक ऐसी  motivational stories  बता रहा हु जिसे पढ़ने के बाद आपकी ऊर्जा पहले जैसी नही रहेगी तो चलिए बिना आपका समय गवाये motivational story को शुरू करते है   हरीश नाम का एक लड़का था उसको  दौड़ने  का बहुत शौक था  वह कई  मैराथन  में हिस्सा ले चुका था  परंतु वह किसी भी race को पूरा नही करता था एक दिन उसने  ठान  लिया कि चाहे कुछ भी हो जाये वह race पूरी जरूर करेगा अब रेस शुरू हुई हरीश ने भी दौड़ना शुरू किया धीरे 2 सारे धावक आगे निकल रहे थे मगर अब हरीश थक गया था वह रुक गया फिर उसने खुद से बोला अगर मैं दौड़ नही सकता तो   कम से कम  चल तो सकता हु उसने ऐसा ही किया वह धीरे 2 चलने लगा मगर वह आगे जरूर बढ़ रहा था अब वह बहुत ज्यादा थक  गया था और नीचे  गिर  पड़ा उसने खुद को बोला की वह कैसे भी करके आज दौड़ को पूरी जरूर करेगा वह  जिद  करके वापस उठा लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ने लगा और अंततः वह रेस पूरी कर गया माना कि वह रेस  हार  चुका था लेकिन आज उसका विश्वास चर...